सियाचिन में क्यों जम जाता है खून का थक्का, जामिया के प्रोफेसर जाहिद अशरफ ने किया शोध

 

सियाचिन में क्यों जम जाता है खून का थक्का, जामिया के प्रोफेसर जाहिद अशरफ ने किया शोध

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर जाहिद अशरफ ने अपने शोध में ने ऐसे मालिक्यूल को ढूंढ़ा है जो ब्लड क्लाटिंग के लिए जिम्मेदार हैं। इस शोध की नतीजे से इसका इलाज अथवा निदान ढूंढ़ने में आसानी होगी।

नई दिल्ली, संवाददाता। सियाचिन दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में शामिल है। मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना के जवान जी-जान से डटे रहते हैं, लेकिन यहां के हालात कितने मुश्किल हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1984 से अब तक आठ सौ से अधिक जवान अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। यह संख्या कारगिल युद्ध में बलिदान हुए सैनिकों से अधिक है। इनमें से 97 प्रतिशत सैनिक मौसम की मार का शिकार बने। 23 हजार से अधिक की ऊंचाई पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड और एक-एक सांस के संघर्ष की वजह से खून का थक्का जम जाता है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर जाहिद अशरफ के शोध से सेना के जवानों की जान बचाने में आसानी होगी। प्रो. जाहिद ने अत्यधिक ऊंचाई पर खून का थक्का जमने के कारणों का पता लगाया है। उन्होंने ऐसे मालिक्यूल को ढूंढ़ा है, जो ब्लड क्लाटिंग के लिए जिम्मेदार हैं।

2016 में विज्ञानियों और सेना के डाक्टरों ने एक अध्ययन किया। इसमें 700 जवानों के चार साल का मेडिकल परीक्षण भी शामिल था। सियाचिन में माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। आमतौर पर एक सैनिक की तीन महीने तक तैनाती होती है। अध्ययन में पाया गया कि 13 जवानों के दिमाग, फेफड़े, लिवर में खून का थक्का जम गया। मल्टी आर्गन फेल्योर होने से देश ने तीन जवानों को खो दिया। मैदानी भागों के मुकाबले यहां खून का थक्का जमने की संभावना सौ गुना अधिक है। इससे बचने के लिए जवानों को विशेष किट दी जाती है।

खून का थक्का जमने के लिए कैलपैन मालिक्यूल जिम्मेदार

प्रो. जाहिद अशरफ कहते हैं कि मानव ही नहीं, जिस रूप में भी जीवन है, उसे जीने के लिए आक्सीजन की जरूरत होती है। अत्यधिक ऊंचाई पर आक्सीजन कम हो जाता है। इस वजह से पैर, लिवर व दिमाग आदि में खून का थक्का जम जाता है, जो खतरनाक साबित होता है। जाहिद अशरफ ने खून का थक्का जमने के कारणों की पड़ताल की। बकौल प्रो.जाहिद शोध के दौरान एक मालिक्यूल का पता चला। इसका नाम कैलपैन है। जब यह मालिक्यूल सक्रिय होता है तो खून जमने की समस्या शुरू हो जाती है। पैथोलाजी के जरिये इस मालिक्यूल का पता लगा।

डा. जेपी सिंह ( सेवानिवृत्त कर्नल) के मुताबिक, मैं लेह लद्दाख में 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पोस्ट पर तैनात था। यहां आक्सीजन की कमी होती है। पोर्टा केबिन में रहना होता है। माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक तापमान होता था। हेलीकाप्टर से खाने का डिब्बा गिराया जाता था। इन जगहों पर फेफड़े में पानी भर जाना और खून का थक्का जमने से तनाव रहता है।