केवल रात में म‍िलती है गोरखपुर के बुद्धू की रबड़ी, इसकी अजब है स्वाद- गजब की मिठास

 

गोरखपुर के बुद्धु की रबड़ी पूरे पूर्वांचल में फेमस है। - प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

Taste of Gorakhpur गोरखपुर में रबड़ी की एक ऐसी दुकान है जो दिन में केवल रात में खुली है है। इसके बाद भी यहां ग्राहकों की लाइन लगती है। उस रबड़ी का स्वाद ही कुछ ऐसा है क‍ि लोग बरबस यहां ख‍िंचे चले आते हैं।

गोरखपुर,  संवाददाता। गोरखपुर शहर के सबसे पुराने मोहल्ले आर्यनगर में रबड़ी की एक ऐसी दुकान है, जो दिन में नहीं शाम ढलने के बाद खुलती है और रात 12 बजे बंद होती है। बावजूद इसके ग्राहक की भीड़ में कभी कमी नहीं होती। दरअसल उस रबड़ी का स्वाद ही कुछ ऐसा है।

अजब स्वाद और गजब की संतुलित मिठास के चलते यह रबड़ी दो-चार वर्षों नहीं सात दशक से स्वाद के शौकीनों की जुबां पर राज कर रही है। यह दुकान बुद्ध की रबड़ी के नाम से मशहूर है। हालांकि बुद्धू करीब तीन दशक पहले ही दुनिया को अलविदा कह चुके हैं लेकिन उनके नाम का जलवा आज भी कायम है।

दो पुस्‍त से चल रही है यह दुकान

आज इस दुकान पर बुद्धू के पुत्र विनोद यादव लल्लू बैठते हैं, जिनका प्रतिबद्धता इस बात को लेकर है दुकान की जाे साख उनके पिता ने बनाई है, वह हर हाल में बनी रहे। रात में ही दुकान खोलने की वजह है यही प्रतिबद्धता है। बकौल लल्लू यह सिलसिला पिता के समय से चला आ रहा है। दिन में वह पूरी तबीयत से रबड़ी बनाते है, शाम को उसे दुकान पर सजाते हैं। यदि दिन में ही दुकान खुल जाएगी, तो रबड़ी जल्दबाजी में बनानी पड़ेगी और उसकी गुणवत्ता घट जाएगी। लल्लू बताते हैं कि 1980 में बीकाम करने के बाद नौकरी करने की बजाया दुकान की कमान संभाल ली।

पूरा पर‍िवार म‍िलकर बनाता है रबड़ी

पिता का मानना था कि जब परिवार के लोग उनका व्यवसाय आगे बढ़ाएंगे तो गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी। आज भी लल्लू ने पिता की नसीहत को याद रखा है। दुकान के कार्य से किसी बाहरी को नहीं जोड़ा है। पूरा परिवार मिलकर रबड़ी बनाने से लेकर दुकान चलाने तक का कार्य करता है। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा व एक बेटी हैं। उनकी दुकान देर शाम आठ बजे खुलती है और तभी से देर रात ग्राहकों की कतार लगी रहती है।

ग्राहक-गाहक में नहीं होता है भेद

पहले बुद्धू और अब लल्लू ग्राहक-ग्राहक में भेद नहीं करते है। साख की एक वजह यह भी है। चाहे कोई 10 रुपये की रबड़ी लेने आए या 500 की, दुकान पर तवज्जो सबको बराबर मिलती है। लल्लू कहते हैं कि उनके लिए सभी ग्राहक भगवान के समान है, चाहे वह अमीर हो या गरीब। यहां पहले आने-पहले पाने के सिद्धांत का भी पूरी प्रतिबद्धता से पालन होता है। चाहे कोई कितना भी महत्वपूर्ण व्यक्ति क्यों न हो।

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