जितनी जल्दी होगी इस जेनेटिक बीमारी की पहचान उतना ही किफायती हो जाता है इलाज, रिसर्च का दावा

 

न्यूरोमस्कुलर रोगों की जल्द पहचान से किफायती हो जाता है इलाज

SMA के जिन मरीजों का सही इलाज नहीं हुआ था उन पर खर्च भी कम था। लेकिन लक्षणों के विकास के बाद जिन लोगों की बीमारी का इलाज शुरू हुआ उनके मुकाबले बाल्यावस्था में जांच के जरिये रोग का पता लगाकर इलाज शुरू करना ज्यादा किफायती रहा

न्यूजर्सी, एएनआइ।  जेनेटिक बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्राफी (spinal muscular atrophy, SMA) की पहचान जितनी जल्दी होती है उसके इलाज में लगने वाला खर्च उतना ही कम हो जाता है। ऐसा दावा एक शोध में किया जा रहा है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं । एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि बच्चों में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) का जल्द पता लगाकर उसका इलाज शुरू करना काफी किफायती हो सकता है। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और धीरे-धीरे उनका क्षय होने लगता है।

149 मरीजों के डेटा का हुआ विश्लेषण

इस शोध का निष्कर्ष 'डेवलपमेंटल मेडिसिन एंड चाइल्ड न्यूरोलाजी (Developmental Medicine & Child Neurology, DMCN) ' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के दौरान शोधार्थियों ने एसएमए के 149 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें 93 ऐसे थे, जिनका इलाज नहीं हुआ था और 42 का लक्षण सामने आने के बाद इलाज किया गया। 14 ऐसे थे जिनकी शुरुआत में ही जांच के बाद इलाज किया गया। इस बीमारी के इलाज में दवा पर अधिक लागत आती है।

बीमारी की पहचान के समय पर निर्भर है इलाज में लगने वाला खर्च

एक नए रिसर्च में दावा किया गया है कि जेनेटिक बीमारी 'SMA' की पहचान जितनी जल्दी हो जाएगी इसके इलाज में उतना ही कम खर्च आएगा। ऐसे में जिन मरीजों का सही इलाज नहीं हुआ था, उन पर खर्च भी कम था। लेकिन, लक्षणों के विकास के बाद जिन लोगों की बीमारी का इलाज शुरू हुआ, उनके मुकाबले बाल्यावस्था में जांच के जरिये रोग का पता लगाकर इलाज शुरू करना ज्यादा किफायती रहा। यूनिवर्सिटी आफ लीज (बेल्जियम) व यूनिवर्सिटी आफ आक्सफोर्ड (ब्रिटेन) से जुड़े अध्ययन के वरिष्ठ लेखक लारेंस सर्वेइस के अनुसार, 'ये आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका वास्ता व्यावहारिक जीवन से है। नवजात की SMA जांच से न सिर्फ उसका भविष्य बेहतर हो सकता है, बल्कि उसके अभिभावक की जेब पर बोझ भी कम पड़ता है। यह आम लोगों के लिए एक बड़ी राहत होगी।'