फसल के रक्षक बनें करौंदे के कांटे, नहीं घुसते जंगली जानवर, कुछ ऐसा बनाया सुरक्षा कवच

 

करौंदा की सुरक्षा कवच के बीच मल्टी लेयर खेती।

करौंदा की सुरक्षा कवच के बीच एमबीए कृषक छह बीघा भूमि में कर रहा मल्टी लेयर खेती। छह बीघा भूमि में 14 तरह की फल सब्जियों का कर रहें है उत्पादन। बेसहारा गोवंशी से फसलों की सुरक्षा करना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

बागपत। जंगली जानवरों के साथ ही बेसहारा गोवंशी से फसलों की सुरक्षा करना किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सुन्हैड़ा गांव के विजय सिंह ने करौंदे के कांटे को फसल का सुरक्षा कवच बनाया। छह बीघा भूमि पर फसलों की सुरक्षा के लिए करौंदे के कांटे फसलों के रक्षक बने हुए है। इससे बेसहारा गोवंशी और जंगली जानवर के खेत में प्रवेश नहीं करने के कारण उनकी फसल सुरक्षित है।

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सुन्हैंडा गांव निवासी युवा किसान विजय सिंह एमबीए किया। इसके बाद नौ साल पहले सात लाख रुपये के पैकेज की नौकरी छोड़ अपनी भूमि पर आर्गेनिक खेती शुरू की। इस बीच खेती के दौरान उन्हें जंगली जानवर और बेसहारा गोवंशी से फसलों को नुकसान झेलना पड़ा। इससे उनकी थोड़ी चिंता बढ़ गई थी। ढाई साल पहले उन्होंने अपने छह बीघा के खेत में नया प्रयोग किया। अपने खेतों के किनारे मेढ़ पर करौंदा के पौधे लगाए। अब ये पौधें पेड़़ बनकर तैयार हुए, तो नुकीले कांटें फसलों के सुरक्षा कवच बन गए। उनका यह प्रयोग सफल रहा, जिस वजह से खेत में बेसहारा गोवंशी और जंगली जानवर प्रवेश नहीं कर पाते है। करौंदे के पेड़ फसलों की सुरक्षा के साथ ही आमदनी का भी साधन बने है। इससे डबल का फायदा हुआ है।

आसपास के किसान आते हैं देखने

युवा किसान विजय सिंह बताते हैं कि यह प्रयोग छह बीमा में किया था, अब 12 बीघा के खेत में करने की तैयारियां कर रहे है। करौंदों को देखने के लिए आस-पास के क्षेत्रों से किसान आते हैं।

jagranछह बीघा खेत में 14 तरह की फसलें

किसान विजय सिंह बताते हैं कि छह बीघा खेत में अलग-अलग खेती की हुई, जिसे मल्टी लेयर खेती कहते है। तीन मेढ़ पर करौंदा है, एक मेढ़ पर सहजन है। एक बीघा भूमि में लौकी, तौरई, खीरा, करेला, अदरक, दो बीघा में अमरूर, मूंग की दाल व पपीता, एक बीघा में आंवला, आडू, नाशपाती, बेर और दो बीघा में ढाचा, ज्वार का उत्पादन कर रहे हैं। इन दो बीघा में ही आसौजी गन्ना की बुआई की तैयारी कर रहे हैं।

इनका कहना है...

किसान विजय का खेतों की सुरक्षा को करौंदे की खेती करने का प्रयोग सराहनीय है। इससे अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे है। करौंदे की खेती से आमदनी होती है। साथ ही कांटे से फसल की सुरक्षा भी।