ममता बनर्जी की विपक्षी नेताओं के साथ बैठक में शामिल होंगे कांग्रेस और वामदलों के नेता, बिखराव रोकने की कोश‍िशें

 

विपक्षी नेताओं की बुधवार को बुलाई गई अपनी बैठक से पहले ममता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली पहुंचते ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी उम्मीदवार तय करने की औपचारिक कसरत शुरू हो गई है। ममता ने मंगलवार को राकांपा नेता शरद पवार से मुलाकात कर राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी रणनीति पर चर्चा की।

 ब्यूरो, नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिल्ली पहुंचते ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी उम्मीदवार तय करने की औपचारिक कसरत शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं की बुधवार को बुलाई गई अपनी बैठक से पहले ममता ने मंगलवार को राकांपा नेता शरद पवार से मुलाकात कर राष्ट्रपति चुनाव से जुड़ी रणनीति पर चर्चा की।

ममता की विपक्षी नेताओं के साथ बैठक बुधवार को होगी

शरद पवार ने इस बैठक में साफ कर दिया कि वे विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं विपक्ष की बागडोर थामने की कसरत के तहत दीदी की बुलाई गई इस बैठक को लेकर असहज होने के बावजूद कांग्रेस और वामदलों ने विपक्षी खेमे में किसी तरह के बिखराव को रोकने के लिए इसमें शामिल होने का फैसला किया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक जरूरत और वक्त का तकाजा है कि परिपक्वता दिखाई जाए, ताकि विपक्ष विभाजित नजर नहीं आए। इसलिए पार्टी नेतृत्व ने राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और रणदीप सुरजेवाला को बैठक में भेजने का फैसला किया है।

विपक्ष में राष्ट्रपति चुनाव पर शुरू हुई मंत्रणा

इसी तरह दीदी के एकतरफा बैठक बुलाने से नाराज वामदल भी शरद पवार के समझाने-बुझाने के बाद बैठक में अपना प्रतिनिधि भेजने पर सहमत हो गए हैं। पवार के मुंबई से मंगलवार को दिल्ली पहुंचते ही राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की सक्रियता तेज हो गई। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी और भाकपा महासचिव डी राजा ने पवार से उनके घर जाकर मुलाकात की। बताया जाता है कि इस दौरान येचुरी और राजा ने ममता के एकतरफा बैठक के फैसले पर एतराज जताया। तब पवार ने उन्हें यह कह कर बैठक में शामिल होने के लिए समझाया कि विपक्ष के बिखराव का संदेश जाना देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ठीक नहीं होगा। इसके बाद ही दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधियों को बैठक में भेजने की बात कही।

कांग्रेस नेताओं के साथ भी पवार विपक्षी बिखराव रोकने को लेकर लगातार संपर्क में बने हुए हैं। राष्ट्रपति चुनाव पर विपक्षी नेताओं की बैठक का एलान करने में लीड लेने के बावजूद विपक्ष के कई शीर्ष नेताओं व मुख्यमंत्रियों के नहीं आने की भनक ने दीदी को बेचैन कर दिया है। इसीलिए दिल्ली पहुंचते ही ममता सबसे पहले पवार से मिलने उनके घर पहुंचीं। इसकी तस्वीर खुद पवार ने ट्विटर पर शेयर की।

राकांपा प्रमुख ने उम्मीदवार बनने से किया इन्कार

सूत्रों के अनुसार, इस दौरान शरद पवार ने ममता को भी साफ कर दिया कि वे विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार बनने के इच्छुक नहीं हैं। सभी को मिलकर नए उम्मीदवार पर सहमति बनानी होगी। वैसे पवार से मिलने के बाद भाकपा नेता डी राजा ने भी कहा कि राकांपा प्रमुख ने राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से इन्कार किया है। पवार ने दीदी को यह समझाने का भी प्रयास किया कि राष्ट्रपति चुनाव को विपक्षी नेतृत्व की कमान थामने के राजनीतिक मकसद के रूप में इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए, क्योंकि आम चुनाव से पहले विपक्ष के आपसी बंटवारे का संदेश सियासी रूप से घातक होगा।

गुलाम नबी आजाद को विपक्ष का उम्मीदवार बनाने की संभावना

बताया जा रहा है कि पवार अपनी तरफ से कांग्रेस के असंतुष्ट खेमे के नेता गुलाम नबी आजाद को विपक्ष का उम्मीदवार बनाने की संभावना टटोल रहे हैं। उन्होंने वामदलों के नेताओं और ममता दोनों की मंशा की थाह ली। बहरहाल, चाहे मजबूरी में ही सही मगर विपक्षी एकता की खातिर कांग्रेस और वामदलों के बैठक में शामिल होने के संदेश के बाद ममता बनर्जी की बुधवार को प्रस्तावित बैठक राष्ट्रपति चुनाव पर विपक्ष की पहली औपचारिक मंत्रणा होगी। इसमें विपक्षी खेमे का कोई अन्य बड़ा मुख्यमंत्री शामिल होगा, इसकी संभावना कम ही है।

ममता के निकट होने के बावजूद तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव बैठक में नहीं आएंगे और अपना प्रतिनिधि भेजेंगे। शिवसेना प्रमुख महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन भी इसमें शरीक नहीं होंगे। उनके प्रतिनिधि ही बैठक में आएंगे। आम आदमी पार्टी भी अपना प्रतिनिधि ही भेजेगी। वैसे संकेत हैं कि इस बैठक में विपक्षी उम्मीदवार पर आपसी चर्चा के लिए नेताओं की समिति बनाने पर सहमति बन सकती है।

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