PFI रैली में भड़काऊ नारेबाजी मामला: NCPCR ने अलापुझा के एसपी को किया तलब, 13 जून को होगी पेशी

 

NCPCR ने अलापुझा के एसपी को किया तलब, 13 जून को होगी पेशी

केरल में एक राजनीतिक रैली के दौरान कथित तौर पर एक बच्चे के भड़काऊ नारे लगाए जाने मामले में बुधवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अलापुझा के एसपी को तलब किया है। इसके तहत उन्हें आयोग के समक्ष 13 जून को पेशी देनी है।

तिरुअनंतपुरम, एएनआइ। केरल में एक राजनीतिक रैली के दौरान कथित तौर पर एक बच्चे के भड़काऊ नारे लगाए जाने मामले में बुधवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने अलापुझा के एसपी को तलब किया है। इसके तहत उन्हें आयोग के समक्ष 13 जून को पेशी देनी है। दरअसल, 21 मई को अलापुझा में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) द्वारा आयोजित गणतंत्र बचाओ रैली के दौरान एक व्यक्ति के कंधे पर बैठे एक लड़के का एक छोटा सा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें वह कथित रूप से भड़काऊ नारे लगा रहा था।

बच्चे के पिता को पुलिस ने किया था गिरफ्तार 

पिछले माह के अंत में केरल हाई कोर्ट के कड़ा रुख अपनाने और राज्य सरकार को 10 साल के लड़के से गैर मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगवाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश देने के बाद पुलिस ने नारेबाजी करने वाले बच्चे के पिता को भी हिरासत में ले लिया था। अलपुझा में 21 मई को पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआइ) की रैली में बच्चे से भड़काऊ नारे लगवाए गए थे।

बच्चे को दी गई थी ट्रेनिंग, पुलिस का आरोप

अलपुझा में पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) की 21 मई की रैली में हिंदुओं और ईसाइयों के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने वाले 10 साल के बच्चे को प्रशिक्षण दिया गया था। मामले की जांच कर रही अलपुझा पुलिस ने दाखिल कराई गई अपनी रिमांड रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है। पुलिस की रिमांड रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चे को एर्नाकुलम निवासी एसडीपीआइ के पदाधिकारी ने प्रशिक्षण दिया था।

पुलिस को NCPCR ने लिखा था पत्र 

आयोग ने केरल पुलिस को इस मामले में पत्र लिखा था। इसमें बताया गया कि रैली संबंधित वायरल वीडियो में PFI का झंडा साफ दिख रहा है। साथ ही यह भी कहा है कि वीडियो के वायरल होने के बाद भी PFI के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। आयोग ने यह भी आरोप लगाया है कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया (SDPI) और PFI इस तरह बच्चों का इस्तेमाल समुदाय में नफरत, दुश्मनी और सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के लिए कर रहे हैं।