नहीं सुलझ रहा मध्यप्रदेश और राजस्थान का सीमा विवाद, खामियाजा भुगत रहे प्रतापगढ़ जिले के छह सौ से अधिक लोग

 


नहीं सुलझ रहा मध्यप्रदेश और राजस्थान का सीमा विवाद, खामियाजा भुगत रहे प्रतापगढ़ जिले के छह सौ से अधिक लोग
;

Madhya Pradesh and Rajasthan Border dispute राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के मध्यप्रदेश के सीमावर्ती गांव मोठिया में छह सौ लोग बसते हैं। इस गांव का एक किलोमीटर लंबा एरिया विवादास्पद है जिस पर राजस्थान और मध्यप्रदेश की सरकार तय कर पा रही है कि यह हिस्सा किस राज्य का है।

उदयपुर,  डेस्क। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दो देशों के बीच आपसी और अंतरराष्ट्रीय मसला है, लेकिन जब भारत के दो राज्यों के बीच सीमा विवाद हो तो उसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है। सीमा विवाद में घिरे राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के नागरिक बेहद परेशान हैं।

एक क्षेत्र विशेष को लेकर राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच आजादी के बाद अभी तक फैसला नहीं होने से लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यहां तक विवादस्पद क्षेत्र में कई दशकों से सड़क नहीं बनी और ना ही कोई विकास हुआ। यहां बारिश के चार महीनों तक सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि किसी वाहन से भी नहीं निकला जाता और लोग अपने रिश्तेदारों तक से नहीं मिल पाते।

 राजस्थान के दो दिन के दौरे पर रहेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सविंधान पार्क का करेंगी उद्घाटन

बारिश में भर जाता है चार फीट तक पानी

बारिश में तो यहां ऐसे हालात हो जाते हैं कि इस सड़क और आसपास के इलाके में चार फीट से अधिक पानी भरने से दोनों राज्यों के लोग चार महीनों तक आ-जा नहीं पाते, जबकि उनके खेत-खलिहान एक-दूसरे राज्य में आते हैं। यही नहीं नजदीकी गांव दलोट, रायपुर, कानगढ़, अंबीरामा, सालमगढ़ सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को मध्यप्रदेश जाने के लिए ही इकलौता रास्ता है। इसके बंद होने पर इन गांवों के लोगों को 23 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना होता है।

विवाद की वजह से कोई धणी-धोरी नहीं

यहां के लोग बताते हैं कि रियासतकाल में सड़क की मध्यप्रदेश की सीमा में मानी जाती थी लेकिन आजादी के बाद जब राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बंटवारा हुआ तो यह सड़क विवादों में आ गई और इसका कोई धणी-धोरी नहीं रहा। ग्रामीण बताते हैं कि मध्यप्रदेश में शामिल राजस्थान सीमा के गांव गुडरखेड़ा के सरपंच माया बोस ने एक बार इस सड़क के निर्माण के लिए प्रयास किए लेकिन सीमांकन के अभाव में काम बीच में ही छोड़ना पड़ा।इसी तरह राजस्थान के बड़ी साखथली गांव के सरपंच जीवन लाल मीणा ने भी विवादास्पद क्षेत्र को छोड़कर सड़क निर्माण का शु्रू कराया लेकिन वह काम भी पूरा नहीं हो पाया। वह यह भी बताते है कि 1994 में राजस्थान सरकार ने ग्रामीणों की परेशानी भांपकर मिट्टी डालकर विवादास्पद क्षेत्र की सड़क उंची करवाई थी लेकिन उसके बाद कभी यहां काम नहीं हुआ